-ःः आनुवंशिकी:-
1. आनुवंशिकी:- विज्ञान की वह शाखा जिसमें आनुवंशिक लक्षणों एवं विभिन्नताओं का अध्ययन किया जाता है उसे आनुवंशिकी कहते है।
2. आनुवंशिक लक्षण:- वे लक्षण जो सजीवों की एक पीढी से दूसरी पीढी में स्थानान्तरित होते है आनुवंशिक लक्षण कहलाते है।
3. आनुवंशिकता/वंशगति/हैरिडीटी:- आनुवंशिक लक्षणों का जनक पीढी से संतति पीढी में संचलन ही आनुवांशिकता कहलाता है।
आनुवांशिकता का जनक ग्रेगर जोन मेण्डल को कहते है इनका जन्म 22 जुलाई 1822 को हुआ।
4. मेण्डल वाद:- मेण्डल ने उद्यान मटर (पाइसम सेटाइवम) पर पादप संकरण के प्रयोग किये इन प्रयोगों के परिणाम के आधार पर मेण्डल ने आनुवंशिकता के नियम बनाये जिन्हे मेण्डल वाद कहते है। जो निम्न है:-
अ. प्रभाविता/एक संकर संकरण का नियम:- इस नियम के अनुसार जब एक ही लक्षण के दो विरोधी गुण वाले पौधो के बीच संकरण कराया जाता है तो थ्1 पीढी में वही लक्षण दिखाई देते है जो प्रभावी होते है। इसी को प्रभाविता का नियम कहते है।
उदाहरण:- यदि शुद्ध लम्बे ;ज्ज्द्ध पौधे का संकरण शुद्ध बौने ;जजद्ध से कराया जाता है तो प्रथम पीढी के सभी पौधे लम्बे होते है। अर्थात् केवल प्रभावी लक्षण ही दिखाई देता है।