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-ःः आनुवंशिकी:- 1. आनुवंशिकी:- विज्ञान की वह शाखा जिसमें आनुवंशिक लक्षणों एवं विभिन्नताओं का अध्ययन किया जाता है उसे आनुवंशिकी कहते है। 2. आनुवंशिक लक्षण:- वे लक्षण जो सजीवों की एक पीढी से दूसरी पीढी में स्थानान्तरित होते है आनुवंशिक लक्षण कहलाते है। 3. आनुवंशिकता/वंशगति/हैरिडीटी:- आनुवंशिक लक्षणों का जनक पीढी से संतति पीढी में संचलन ही आनुवांशिकता कहलाता है। आनुवांशिकता का जनक ग्रेगर जोन मेण्डल को कहते है इनका जन्म 22 जुलाई 1822 को हुआ। 4. मेण्डल वाद:- मेण्डल ने उद्यान मटर (पाइसम सेटाइवम) पर पादप संकरण के प्रयोग किये इन प्रयोगों के परिणाम के आधार पर मेण्डल ने आनुवंशिकता के नियम बनाये जिन्हे मेण्डल वाद कहते है। जो निम्न है:- अ. प्रभाविता/एक संकर संकरण का नियम:- इस नियम के अनुसार जब एक ही लक्षण के दो विरोधी गुण वाले पौधो के बीच संकरण कराया जाता है तो थ्1 पीढी में वही लक्षण दिखाई देते है जो प्रभावी होते है। इसी को प्रभाविता का नियम कहते है। उदाहरण:- यदि शुद्ध लम्बे ;ज्ज्द्ध पौधे का संकरण शुद्ध बौने ;जजद्ध से कराया जाता है तो प्रथम पीढी के सभी पौधे लम्बे होते है। अर्थात् क...

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अध्याय - 10 विद्धुत धारा

अध्याय - 10  विद्धुत धारा  एकांक समय में प्रवाहित आवेश की दर विद्युत धारा कहलाती है (1)किसी परिपथ में विद्युत का प्रवाह उच्च विभव से निम्न विभव की ओर होता है | (2) विद्युत धारा की दिशा धन आवेश से ऋण आवेश की ओर होती है | (3) इलेक्ट्रॉनों की गति धारा के विपरीत दिशा में होती है| I = Q/t I = ne/t जहां e =1.6×10-19 कूलाम मात्रक = कूलाम/ समय = एंपियर 1 मिली एंपियर = 10-3 एंपियर एक माइक्रो एंपियर  = 10-6 एंपियर एक एंपियर की परिभाषा किसी परिपथ के किसी बिंदु से यदि 1 सेकंड में एक कूलाम आवेश गुजरता है तो उस परिपथ में धारा 1 एम्पीयर होगी किसी विद्युत परिपथ में एकांक धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने के लिए किया गया कार्य उन दोनों बिंदुओं के मध्य विभवांतर के बराबर होता है Va-Vb = W/Q = जूल/ कूलाम = बोल्ट अनंत से एकांक धन आवेश को किसी बिंदु पर लाने में किया गया कार्य विद्युत विभव कहलाता है | विभवांतर का मापन बोल्ट मीटर से करते हैं जबकि धारा का मापन   मीटर से करते हैं ओम के अनुसार किसी चालक तार के सिरों के मध्य उत्पन्न विभवांतर...

अध्याय - 2 मानव तंत्र

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अध्याय - 2  मानव तंत्र   शरीर की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई  कहलाती है । समान रचना तथा समान कार्य वाली कोशिकाओं के समूह को उत्तक कहते हैं । बहुत से उत्तक मिलकर शरीर के अंगों का निर्माण करते हैं । शरीर के विभिन्न अंग किसी विशिष्ट कार्य को करने के लिए एक तंत्र का निर्माण करते हैं । मनुष्य में निम्न तंत्र होते हैं - 1 पाचन तंत्र 2 स्वसन तंत्र 3 रक्त एवं परिसंचरण तंत्र 4 उत्सर्जन तंत्र 5 जनन तंत्र 6 तंत्रिका तंत्र 7 अंतः स्रावी तंत्र पाचन तंत्र - भोजन के जटिल पोषक पदार्थों व बड़े अणुओं को विभिन्न रासायनिक क्रियाओं और एंजाइम की सहायता से सरल व छोटे अणुओं में बदलना पाचन कहलाता है तथा जो तंत्र का कार्य करता है उसे पाचन तंत्र कहते हैं । पाचन तंत्र के अंगों व ग्रंथियों के नाम - पाचन अंग - 1.मुख  2.ग्रसनी  3.ग्रास नली  4.आमाशय  5.छोटी आंत  6.बड़ी आंत  7.मलद्वार पाचन ग्रंथियां - 1)लार ग्रंथि - मनुष्य के मुख में 3 जोड़ी लार ग्रंथि पाई जाती है । A) कर्णमूल ग्रंथि B) कर्णपूर्व ग्रंथि C) अधो जंभ ग्रंथि ...

अध्याय - 7 परमाणु सिद्धांत, तत्वों का आवर्त वर्गीकरण व गुणधर्म

अध्याय - 7   परमाणु सिद्धांत, तत्वों का आवर्त वर्गीकरण व गुणधर्म सर्वप्रथम महर्षि कणाद ने बताया की पदार्थ सूक्ष्मतम अविभाज्य कणों से मिलकर बना होता हैं जिन्हें परमाणु कहते हैं | पकुधा काव्यायाम ने बताया की पदार्थ के भिन्न भिन्न रूप प रमाणुओ के मिलने से बनते हैं | डाल्टन का परमाणु सिद्धांत   डाल्टन के अनुसार - 1. पदार्थ सूक्ष्मतम कणों से मिलकर बना होता हैं जिन्हें परमाणु कहते हैं | 2. परमाणु अविभाज्य कण हैं | 3. एक ही तत्त्व के सभी परमाणुओ के आकार, भार तथा रासायनिक गुणधर्म सामान होते हैं | 4. अलग अलग   तत्त्वो   के सभी परमाणु आकार, भार तथा रासायनिक गुणधर्म भिन्न भिन्न   होते हैं | 5. भिन्न भिन्न तत्वों के परमाणु परस्पर छोटी पूर्ण संख्या के अनुपात में संयोग कर यौगिक बनाते हैं | 6. रासायनिक अभिक्रिया के दौरान परमाणु न तो बनते हैं न ही नष्ट होते हैं | थोमसन का परमाणु मोडल थोमसन के अनुसार 1. परमाणु एक धनावेशित गोला होता हैं इसमें सामान मात्रा में इलेक्ट्रान वितरित होते हैं इस मोडल को प्लम पुडिंग कहा गया | 2. परमाणु में ...