अध्याय - 5 दैनिक जीवन मे रशायन
अध्याय - 5
दैनिक जीवन मे रशायन
वे पदार्थ जो स्वाद में खट्टे और नीले लिटमस
पत्र को लाल कर देते हैं अम्ल कहलाते हैं |
प्रबल अम्ल- HCl, H2SO4, HNO3
दुर्बल अम्ल- CH3COOH, H2CO3
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वे पदार्थ जो स्वाद में कड़वे और लाल लिटमस पत्र को नीला कर
देते हैं क्षार कहलाते हैं |
प्रबल क्षार- NaOH, KOH
दुर्बल क्षार - NH4OH,
Mg(OH)2
|
लवण - जब अम्ल तथा क्षार एक दूसरे से अभिक्रिया करते हैं तो लवण तथा जल का निर्माण होता है यह प्रक्रिया उदासीनीकरण कहलाती है
उदासीन लवण - प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार
अम्लीय लवण - प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षार
क्षारीय लवण - दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार
क्रिस्टलन जल - लवण के क्रिस्टल के इकाई सूत्र में जल के निश्चित अणुओं की संख्या को क्रिस्टलन कहते हैं
आरेनियस संकल्पना - आरेनियस के अनुसार अम्ल वह पदार्थ है जो जलीय अम्ल में H+ आयन देते हैं जबकि क्षारीय वे पदार्थ है जो जलीय विलियन में OH- आयन देते हैं ।
यहां जल प्रोटोन दाता है अर्थात अम्ल है यह प्रोटॉन देखकर संयुग्मी क्षार OH- में बदल जाता है जबकि अमोनिया प्रोटॉन ग्राही है अर्थात क्षार है जो प्रोटॉन ग्रहण करें करके संयुग्मी अम्ल H+ में बदल जाता है
अम्ल क्षार की लुईस अवधारणा - लुईस के अनुसार वे पदार्थ जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करते हैं अम्ल कहलाते हैं जबकि वे पदार्थ जो इलेक्ट्रॉन युग्म त्याग करते हैं क्षार कहलाते हैं |
H3N: + BF3 → H3N→BF3
(1) लुईस अम्ल - इलेक्ट्रॉन की कमी वाले योगिक लुईस अम्ल होते हैं जैसे - BF3, AlCl3, Mg+2, Na+
(2) लुइस क्षार - इलेक्ट्रॉन का एकाकी युग में रखने वाले योगिक लुईस क्षार होते हैं जैसे - H2O, NH3,OH-
जीवन में PH का महत्व -
1. उदर में अम्लता - उदर में जठर रस जिसमें HCl होता है जब HCl अधिक बनता है तो उदर में जलन व दर्द होता है । अतः अम्ल की अधिक मात्रा को उदासीन करने के लिए Mg (OH)2 मिल्क ऑफ मैग्नीशिया का प्रयोग करते हैं ।
2. दंत क्षय - मुख का सामान्य PH 6.5 होता है दातों में उपस्थित अपशिष्ट भोजन में अम्लता उत्पन्न करते हैं जब PH का मान 5.5 से कम होता हैं तब इनेमल का क्षय होने लगता हैं अतः खाना खाने के बाद दंतमंजन या क्षारीय विलयन से मुख की सफाई करनी चाहिए |
3.अम्ल वर्षा - पप्रदूषको के कारण वर्षा के जल का PH कम होने लगता है प्रदूषण पर नियंत्रण रखकर अम्लीय वर्षा पर नियंत्रण किया जा सकता है
4.मृदा का PH - मृदा की PH ज्ञात कर उपयुक्त फसल बोकर अच्छी फसल प्राप्त की जा सकती है ।
5.कीटो का डंक - मधुमक्खी , चिटी या मकोड़े के डंक से अम्ल स्त्रावित होता है जो त्वचा के संपर्क में आने पर जलन व दर्द उत्पन्न करते हैं यदि उसी समय क्षारीय लवणों NaHCO3 का प्रयोग करें तो अम्ल का प्रभाव उदासीन हो जाता है ।
साबुनीकरण - तेल या वसा अम्लों को सोडियम हाइड्रोक्साइड या पोटेशियम हाइड्रोक्साइड के साथ गर्म करके साबुन बनाने की प्रक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं | पारदर्शी साबुन बनाने के लिए ग्लिसरीन का प्रयोग करते हैं |
मिसेल निर्माण - साबुन द्वारा कपड़ों को साफ करते समय मिशेल संरचना बनती है इस संरचना में साबुन का कार्बनिक भाग (RCOO-) मेल के साथ जुड़ता है इसे जल विरोधी कहते हैं तथा साबुन का (Na+)/K+ युक्त आयनिक भाग जल में घुलता है इसे जल स्नेही कहते हैं इस प्रकार मेल के चारों और मिशेल बन जाता है बाहरी सिर पर उपस्थित जल स्नेही भाग जल से आकर्षित होकर मेल को भी जल में खींच लेता है ।
साबुन तथा अपमार्जक मे अंतर
अम्ल क्षार के सामान्य गुण -
(1) अम्ल धातु के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन गैस लेते हैं यही कारण है कि खट्टे अम्लीय पदार्थ धातु के बर्तन में नहीं रखे जाते है |
H2SO4 + Zn → ZnSO4 + H2
(2) धातु क्षार के साथ क्रिया करके लवण तथा हाइड्रोजन गैस देते हैं |
2NaOH + Zn → Na2ZnO+ H2
(3) अम्ल धातु ऑक्साइड के साथ क्रिया करके लवण व जल देते हैं |
CuO + 2HCl → CuCl2 + H2O
(1)HNO3 का उपयोग सोने व चांदी के गहने को साफ करने में करते हैं |
(2) अम्लराज (1HNO3 + 3HCL)सोने जैसी धातुओं को धोने में उपयोग करते हैं |
(3) H2SO4 को अम्लों का राजा कहते हैं इसका उपयोग सेल कार बैटरी उद्योग आदि में किया जाता है |
(4) एसिटिक अम्ल का उपयोग आचार बनाने में करते हैं |
क्षार के उपयोग
(1)Ca(OH)2 कैल्शियम हाइड्रोक्साइड का उपयोग मिट्टी की अमृता दूर करने में करते हैं |
(2)Mg(OH)2 को मिल्क ऑफ मैग्नीशिया भी कहते हैं यह पेट की अम्लता व पेट की कब्ज को दूर करने में उपयोगी है |
लवण के उपयोग
(1)CaOH 3 कैल्शियम कार्बोनेट का उपयोग संगमरमर के रूप में फर्श बनाने सीमेंट बनाने आदि में उपयोग करते हैं |
(2)AgNO 3 सिल्वर नाइट्रेट का उपयोग फोटोग्राफी में करते हैं |
(3)K2SO4 फिटकरी का उपयोग जल शोधन में करते हैं |
PH स्केल -
PH एक पैमाना होता है जिसकी सहायता से किसी पदार्थ की अम्लीय तथा क्षारीय था तथा उदासीन प्रकृति का निर्धारण होता है |
हाइड्रोजन आइनों की सांद्रता का ऋणात्मक लोगरिथम PH कहलाता है अर्थात -
नोट -
उदासीन लवण - प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार
अम्लीय लवण - प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षार
क्षारीय लवण - दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार
क्रिस्टलन जल - लवण के क्रिस्टल के इकाई सूत्र में जल के निश्चित अणुओं की संख्या को क्रिस्टलन कहते हैं
आरेनियस संकल्पना - आरेनियस के अनुसार अम्ल वह पदार्थ है जो जलीय अम्ल में H+ आयन देते हैं जबकि क्षारीय वे पदार्थ है जो जलीय विलियन में OH- आयन देते हैं ।
1.HCl → H+ + Cl- 1. NaOH → Na+ +
OH-
2.H2SO4 → 2H+ + SO4 2.KOH → K+ + OH-
ब्रोस्टेंट लोरी संकल्पना - ब्रोस्टेंट लोरी के अनुसार अम्ल प्रोटॉन दाता है तथा क्षार प्रोटोन ग्राही होता है |
NH3
+ H2O ==== NH4+ +
OH-
यहां जल प्रोटोन दाता है अर्थात अम्ल है यह प्रोटॉन देखकर संयुग्मी क्षार OH- में बदल जाता है जबकि अमोनिया प्रोटॉन ग्राही है अर्थात क्षार है जो प्रोटॉन ग्रहण करें करके संयुग्मी अम्ल H+ में बदल जाता है
अम्ल क्षार की लुईस अवधारणा - लुईस के अनुसार वे पदार्थ जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करते हैं अम्ल कहलाते हैं जबकि वे पदार्थ जो इलेक्ट्रॉन युग्म त्याग करते हैं क्षार कहलाते हैं |
H3N: + BF3 → H3N→BF3
(1) लुईस अम्ल - इलेक्ट्रॉन की कमी वाले योगिक लुईस अम्ल होते हैं जैसे - BF3, AlCl3, Mg+2, Na+
(2) लुइस क्षार - इलेक्ट्रॉन का एकाकी युग में रखने वाले योगिक लुईस क्षार होते हैं जैसे - H2O, NH3,OH-
1. उदर में अम्लता - उदर में जठर रस जिसमें HCl होता है जब HCl अधिक बनता है तो उदर में जलन व दर्द होता है । अतः अम्ल की अधिक मात्रा को उदासीन करने के लिए Mg (OH)2 मिल्क ऑफ मैग्नीशिया का प्रयोग करते हैं ।
2. दंत क्षय - मुख का सामान्य PH 6.5 होता है दातों में उपस्थित अपशिष्ट भोजन में अम्लता उत्पन्न करते हैं जब PH का मान 5.5 से कम होता हैं तब इनेमल का क्षय होने लगता हैं अतः खाना खाने के बाद दंतमंजन या क्षारीय विलयन से मुख की सफाई करनी चाहिए |
3.अम्ल वर्षा - पप्रदूषको के कारण वर्षा के जल का PH कम होने लगता है प्रदूषण पर नियंत्रण रखकर अम्लीय वर्षा पर नियंत्रण किया जा सकता है
4.मृदा का PH - मृदा की PH ज्ञात कर उपयुक्त फसल बोकर अच्छी फसल प्राप्त की जा सकती है ।
5.कीटो का डंक - मधुमक्खी , चिटी या मकोड़े के डंक से अम्ल स्त्रावित होता है जो त्वचा के संपर्क में आने पर जलन व दर्द उत्पन्न करते हैं यदि उसी समय क्षारीय लवणों NaHCO3 का प्रयोग करें तो अम्ल का प्रभाव उदासीन हो जाता है ।
साबुनीकरण - तेल या वसा अम्लों को सोडियम हाइड्रोक्साइड या पोटेशियम हाइड्रोक्साइड के साथ गर्म करके साबुन बनाने की प्रक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं | पारदर्शी साबुन बनाने के लिए ग्लिसरीन का प्रयोग करते हैं |
- साबुन मृदु जल में कपड़ों की सफाई करते हैं परंतु कठोर जल में Ca2+ तथा Mg 2+आयन होने से साबुन के Na+ आयनों को प्रतिस्थापित कर कैल्शियम एवं मैग्नीशियम लवण बना देते हैं जो जल में अघुलनशील होते हैं जिससे सफाई क्रिया नहीं होती है ।
मिसेल निर्माण - साबुन द्वारा कपड़ों को साफ करते समय मिशेल संरचना बनती है इस संरचना में साबुन का कार्बनिक भाग (RCOO-) मेल के साथ जुड़ता है इसे जल विरोधी कहते हैं तथा साबुन का (Na+)/K+ युक्त आयनिक भाग जल में घुलता है इसे जल स्नेही कहते हैं इस प्रकार मेल के चारों और मिशेल बन जाता है बाहरी सिर पर उपस्थित जल स्नेही भाग जल से आकर्षित होकर मेल को भी जल में खींच लेता है ।
साबुन तथा अपमार्जक मे अंतर
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साबुन
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अपमार्जक
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साबुन लंबी श्रृंखला वाले
कार्बॉक्सिलिक अम्लों के लवण होते हैं ।
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अपमार्जक लंबी श्रृंखला वाले
कार्बॉक्सिलिक अम्लों के लवण होते हैं ।
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यह कठोर जल में प्रभावी होते हैं ।
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यह कठोर जल में प्रभावी होते हैं ।
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साबुन को वनस्पति तेल या वर्षा से
बनाया जाता है ।
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अपमार्जक को कोयले या पेट्रोलियम
हाइड्रो कार्बन से बनाया जाता है ।
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अम्ल क्षार के सामान्य गुण -
(1) अम्ल धातु के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन गैस लेते हैं यही कारण है कि खट्टे अम्लीय पदार्थ धातु के बर्तन में नहीं रखे जाते है |
H2SO4 + Zn → ZnSO4 + H2
2NaOH + Zn → Na2ZnO+ H2
(3) अम्ल धातु ऑक्साइड के साथ क्रिया करके लवण व जल देते हैं |
CuO + 2HCl → CuCl2 + H2O
(4) शहर और अधातु के साथ क्रिया करके लवण तथा जल देते हैं |
CO2 + Ca(OH)2 CaCO3 + H2O
अम्ल के उपयोग -
(2) अम्लराज (1HNO3 + 3HCL)सोने जैसी धातुओं को धोने में उपयोग करते हैं |
(3) H2SO4 को अम्लों का राजा कहते हैं इसका उपयोग सेल कार बैटरी उद्योग आदि में किया जाता है |
(4) एसिटिक अम्ल का उपयोग आचार बनाने में करते हैं |
क्षार के उपयोग
(1)Ca(OH)2 कैल्शियम हाइड्रोक्साइड का उपयोग मिट्टी की अमृता दूर करने में करते हैं |
(2)Mg(OH)2 को मिल्क ऑफ मैग्नीशिया भी कहते हैं यह पेट की अम्लता व पेट की कब्ज को दूर करने में उपयोगी है |
लवण के उपयोग
(1)CaOH 3 कैल्शियम कार्बोनेट का उपयोग संगमरमर के रूप में फर्श बनाने सीमेंट बनाने आदि में उपयोग करते हैं |
(2)AgNO 3 सिल्वर नाइट्रेट का उपयोग फोटोग्राफी में करते हैं |
(3)K2SO4 फिटकरी का उपयोग जल शोधन में करते हैं |
PH स्केल -
PH एक पैमाना होता है जिसकी सहायता से किसी पदार्थ की अम्लीय तथा क्षारीय था तथा उदासीन प्रकृति का निर्धारण होता है |
हाइड्रोजन आइनों की सांद्रता का ऋणात्मक लोगरिथम PH कहलाता है अर्थात -
PH = -log10[H+]
- H+ आयनों की सांद्रता जितनी अधिक होगी PH का मान उतना ही कम होगा |
- उदासीन विलयन के PH का मान 7 होता है |
- उदासीन जल के लिए (H+) व (OH-) की सांद्रता 1 x 10-7 mol/Ltr होती हैं |
दैनिक जीवन मे कुछ उपयोगी यौगिक
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योगिक का नाम
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रासायनिक नाम
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बनाने की विधि
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उपयोग
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साधारण नमक
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सोडियम क्लोराइड
NaCl
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शुद्ध
नमक प्राप्त करने के लिए NaCl के संतृप्त विलियन में बड़ी-बड़ी
टंकियों में HCl गैस प्रवाहित की जाती है ।
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1.साधारण नमक के रूप में भोजन में
उपयोग करते हैं ।
2.खाद्य परीक्षण में ।
3. हिमिकरण मिश्रण बनाने में ।
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कास्टिक सोडा
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सोडियम हाइड्रोक्साइड
NaOH
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NaOH का उत्पादन सोडियम क्लोराइड के
विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है ।
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1. प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप
में ।
2. साबुन के कागज आदि के निर्माण में
।
3. पेट्रोल के शोधन में ।
4. वसा तेलो के निर्माण में ।
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विरंजक चूर्ण
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कैल्शियम ऑक्सिक्लोराइड
CaOCl2
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CaOCl2 का
उत्पादन शुष्क बुझे चूने पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करके करते हैं ।
विरंजक
क्रिया - विरंजक चूर्ण को जैसे ही पानी में घोलते हैं उससे मुक्त क्लोरीन गैस
पानी से सहयोग करके नवजात ऑक्सीजन निकालती है यह नवजात ऑक्सीजन रंगीन पदार्थों
को रंगहीन बना देती है ।
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1. वस्त्र उद्योग में विरंजक के रूप
में ।
2. कागज उद्योग में विरंजक के रूप
में ।
3. पेय जल को शुद्ध करने में ।
4. प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप
में ।
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बेकिंग सोडा
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सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट
NaHCO3
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सोडियम
कार्बोनेट के विलियन में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करके इसे बनाया जाता है
।
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1. खाद्य पदार्थों में बेकिंग पाउडर
के रूप में ।
2. सोडा वाटर तथा सोडा युक्त शीतल
पेय के रूप में ।
3. अग्निशामक यंत्र में ।
4. प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप
में ।
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धावन सोडा
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सोडियम कार्बोनेट
Na2CO3. 10H2O
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सोडियम
कार्बोनेट का निर्माण साल्वे
विधि द्वारा किया जाता है इसे बनाने के लिए बेकिंग सोडा को गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट प्राप्त होता है उसके
क्रिस्टलीकरण से धावन सोडा प्राप्त होता है धावन सोडा को गर्म करने पर सोडा ऐश
बनता है |
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1. धुलाई व सफाई में ।
2. अपमार्जक के रूप में ।
3. कागज पैंट वस्त्र उद्योग में ।
4. प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप
में ।
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प्लास्टर
ऑफ पेरिस
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कैल्शियम
सल्फेट का अर्ध हाइड्रेट
CaSO4 . 1/2 H2O
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जिप्सम CaSO4 . 2 H2O को 393 K ताप पर गर्म करने पर POP प्राप्त होता हैं |
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1. टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के
लिए प्लास्टर चढ़ाने में ।
2. भवन निर्माण में ।
3. अग्नि सह पदार्थ के रूप में ।
4. मूर्तियां बनाने में तथा सजावट के
रूप में ।
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