अध्याय - 9 प्रकाश


प्रकाश एक ऊर्जा है जो हमारी दृष्टि  संवेदन के लिए उत्तरदाई है
प्रत्येक वस्तु हमें प्रकाश की उपस्थिति में दिखाई देती है |
प्रकाश
 

   किरण                                                                तरंग
न्यूटन - प्रकाश एक किरण  है जो परावर्तन और अपवर्तन की घटना बताता है
हाईगेन - प्रकाश एक तरंग है जो व्यतिकरण ध्रुवण विवर्तन अपवर्तन व परावर्तन की घटना को बताता है
डी ब्रोग्ली  - प्रकाश द्वेत प्रकृति का होता है कण, तरंग
प्लांक - के अनुसार प्रकाश छोटे छोटे पैकेट (बंडल) के रूप में होता है जिसे फोटोन (क्वांटा) कहते हैं
आइंस्टीन ने प्लांक की थ्योरी से प्रकाश विद्युत प्रभाव को समझाया
मैक्स वेल के अनुसार प्रकाश किरण विद्युत चुंबकीय विकिरण EVM के रूप में चलती है
प्रकाश


                कण                                  तरंग           
वैज्ञानिक डी ब्रोग्ली के अनुसार प्रकाश द्वेत प्रकृति का होता है जिसके अनुसार प्रकाश  कण तरंग दोनों प्रकार का व्यवहार करता है |
वर्तमान में प्रकाश के  द्वैतवाद को क्वांटम यांत्रिकी में तरंग पैकेट (फोटोन) कहते हैं |
अध्यारोपण तथा विवर्तन की घटनाओं को समझने के लिए प्रकाश के तरंग स्वरूप की सहायता ली जाती है जबकि प्रकाश के विद्युत प्रभाव (आइंस्टीन )को समझने के लिए प्रकाश के कण  स्वरूप की सहायता ली जाती है |
प्रकाश का स्पेक्ट्रम
गामा किरण
एक्स किरण
पराबैंगनी
दृश्य प्रकाश
अवरक्त
रेडियो

बे
जा
नी
पी
ना
ला

प्रकाश किसी वस्तु पर गिरता है तो वह वस्तु प्रकाश की रंगो को अवशोषित कर लेता है तथा कुछ रंगो का परावर्तन करता है |

जब यह परावर्तित प्रकाश नेत्रों पर आता है तो नेत्र में उसका प्रतिबिंब रेटिना पर बनाता है रेटीना से संवेदना मस्तिष्क तक पहुंचती है एवं हम वस्तु का उसका रंग देख पाते हैं  |

जब कोई वस्तु प्रकाश के सभी रंगों को अवशोषित करती है तो वह वस्तु काली दिखाई देती है जबकि जो वस्तु सभी रंगो का परावर्तन करती है तो वह वस्तु सफेद दिखाई देती है |
प्रकाशकापरावर्तन

प्रकाश किरणों का किसी समतल सतह से टकराकर पुनः उसी माध्यम में लौट जाने की घटना को परावर्तन कहते हैं  |परावर्तन दो प्रकार का होता है

नियमित परावर्तन  - जब प्रकाश किरणे किसी समतल या चिकने पृष्ठ पर आपतीत होती है तो उन्हें उसी माध्यम में एक विशिष्ट दिशा में लौट जाती है इसे नियमित परावर्तन कहते हैं |
विसरित परावर्तन - जब प्रकाश किरणे किसी खुर्दरे पृष्ठ पर आपतित होती  है तो विभिन्न दिशाओं में विसारित हो जाती है इसे विसरित परावर्तन कहते हैं |


कांच या पारदर्शी पदार्थ के पीछे वाले भाग पर परावर्तक आवरण (चांदी अथवा एलुमिनियम की परत) लगाकर दर्पण या परावर्तक पृष्ठ की तरह उपयोग में लिया जा सकता है
परावर्तन के नियम
1.आपतित किरण परावर्तित किरण तथा अभिलंब आपतन बिंदु पर एक ही समतल में होते हैं
2. आपतन कोण( कोण i) = परावर्तन कोण (कोण r)

समतल दर्पण में बनने वाला प्रतिबिंब आभासी , वस्तु के बराबर होता है
वस्तु से दर्पण की दूरी तथा प्रतिबिंब से दर्पण की दूरी बराबर होती है
वस्तु का प्रतिबिंब पार्श्व परावर्तन का गुण रखता  है ।
समतल दर्पण में यदि बिंब पूरा देखना हो तो दर्पण बिंब आधा होना चाहिए
समतल दर्पण में बना कौन है यदि सम है तो 360/@  यदि विषम है तो 360/@-1

गोलीय दर्पण

ऐसे दर्पण जिनके परावर्तक पृष्ठ गोलीय होते हैं उन्हें गोलीय दर्पण कहते हैं

                                                                           गोलीय दर्पण
 


अवतल                                                                                   उतल दर्पण

ऐसे परावर्तक पृष्ठ (परावर्तन करने वाले पृष्ठ) जो अंदर की और वक्रीत हो अवतल दर्पण कहलाते हैं
ऐसे परावर्तक पृष्ठ( परावर्तन करने वाला पृष्ठ) जो बाहर की और वक्रीत हो उन्हें उत्तल दर्पण कहते हैं

अवतल दर्पण पर आने वाली समांतर किरणें परावर्तन बाद अभिसारीत होकर एक बिंदु पर मिलती है जिसे फोकस बिंदु कहते हैं

उत्तल दर्पण पर आने वाली समांतर किरणें परावर्तन के बाद अपसारित होती है  इन परावर्तित किरणों को दर्पण के पीछे मिलाने पर एक बिंदु पर मिलती है जिसे दर्पण का फोकस बिंदु कहते हैं

परावर्तक पृष्ठ

 



मुख्य अक्ष               C              F                                                                   ध्रुव

ध्रुव -गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के केंद्र को दर्पण का ध्रुव कहते हैं
वक्रता केंद्र - गोलीय दर्पण का परावर्तक पृष्ठ एक गोले का भाग है अतः इस गोले के केंद्र को ही वक्रता केंद्र कहते हैं
वक्रता त्रिज्या - गोलीय दर्पण का परावर्तक पृष्ठ एक गोले का भाग है इस गोले की त्रिज्या को ही वक्रता त्रिज्या कहते हैं
मुख्य अक्ष - गोलीय दर्पण के ध्रुव तथा इसकी वक्रता केंद्र से गुजरने वाली काल्पनिक रेखा रेखा मुख्यत कहलाती है
फोकस बिंदु - मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली स्थित किरण को परावर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष के जिस बिंदु से होकर गुजरती है या गुजरती हुई प्रतीत होती है से बिंदु कहते हैं
फोकस दूरी - ध्रुव तथा फोकस बिंदु के मध्य की दूरी को फोकस दूरी कहते

Ø  गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या फोकस दूरी  की दुगनी होती है

दर्पण के लिए कार्तीय चिन्ह परिपाटी


गोलीय दर्पण से प्रतिबिंब का निर्माण के नियम
1. मुख्य अक्ष के समांतर आपतित किरण परावर्तन के बाद फोकस बिंदु से गुजरती है
2. फोकस बिंदु से आती हुई किरणें परावर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है
3. वक्रता केंद्र से आने वाली आपतित किरण परावर्तन के पश्चात पुनः उसी पथ पर लौट जाती है
4. यदि कोई प्रकाश किरण दर्पण के ध्रुव पर आपतित होती है  तो आपतित किरण मुख्य अक्ष के साथ जितना कोण बनाती है परावर्तन किरण भी मुख्य अक्ष के साथ उतना ही कोण बनाती है

अवतल दर्पण पर निम्न प्रतिबिंब का निर्माण
जब बिंब अनंत पर हो, जब बिंब वक्रता केंद्र से परे हो, वक्रता केंद्र पर हो, जब बिंब वक्रता केंद्र तथा फोकस बिंदु के बीच में हो, जब बिंब फोकस बिंदु पर हो

वस्तु
2F ©
F
प्रतिबिंब
F
2F©
उत्तल लेंस अवतल दर्पण
स्थिति आकार और प्रकृति

उतल दर्पण पर प्रतिबिंब का निर्माण
1. मुख्य अक्ष के समांतर आपतित किरण परावर्तन के पश्चात फोकस बिंदु से गुजरती हुई प्रतीत होती है
2. वक्रता केंद्र पर आप अतीत होने वाली किरण परावर्तन के बाद उसी पथ पर लौट जाती है


1. अक्ष के समांतर किरण
2. फोक्सीय किरण
3. अभिलंब किरण
4. टीवीएस किरण
                                                                           प्रकीर्णन

अति सूक्ष्म धूल कणों के द्वारा प्रकाश का बिखर जाना प्रकीर्णन कहते हैं |
जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल की गैसों के अणुओं से प्रकीर्णित होता है तो नीले रंग की तरंग सर्वाधिक विस्तृत होती है अतः हमें आकाश नीला दिखाई देता है |
प्रकीर्णन तरंग धैर्य के व्युत्क्रमानुपाती होता है |
                                                                                         
                                             प्रकाश का अपवर्तन


जब प्रकाश की किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है तो यह अपने पथ से विचलित हो जाती है इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं

*सघन और विरल माध्यम को समझाने के लिए कांच की सिल्ली से अपवर्तन का प्रयोग
जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करती है तो अभिलंब की ओर झुक जाती है
जब प्रकाश किरण से विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करती है  अभिलंब से दूर हट जाती है
जब प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है तो प्रकाश का वेग परिवर्तित हो जाता है परंतु आवृत्ति वही रहती है इसी कारण से अपवर्तन की घटना होती है

अपवर्तन के नियम
1 आपतित किरण, अपवर्तित किरण एवं अभिलंब तीनों एक ही पल में होते हैं
2 किन्ही दो माध्यमों के लिए आपतन कोण r की ज्या तथा अपवर्तन कोण iकी ज्या का अनुपात नियत होता है (स्नेल का नियम)

अपवर्तन के दैनिक जीवन में उपयोग
1 तारों का टिमटिमाना
2 पानी में डूबी हुई छठ का मुड़ा हुआ दिखाई देना
3 पानी में डूबी वस्तु का ऊंचा उठा दिखाई देना
4 सूर्य के प्रकाश का सूर्योदय से पहले तथा सूर्यास्त के बाद भी बने रहना



अपवर्तनांक
अपवर्तनांक दिए गए दो माध्यमों में प्रकाश के बेगो का अनुपात होता है यह एक नियतांक है

अपवर्तनांक = प्रथम माध्यम में वेग/ द्वितीय माध्यम में वेग

जब प्रकाश की किरण निर्वात से किसी माध्यम में प्रवेश करती है तो इसे उस माध्यम का निर्वात के सापेक्ष अपवर्तनांक निरपेक्ष अपवर्तनांक कहलाता है

अपवर्तनांक प्रकृति घनत्व तथा प्रकाश के रंग (तरंग धैर्य ) पर निर्भर करता है
बैंगनी रंग  के लिए प्रकाश का अपवर्तनांक सबसे अधिक जबकि लाल रंग  के लिए प्रकाश का अपवर्तनांक सबसे कम होता है

भिन्न-भिन्न पदार्थों का अपवर्तनांक सारणी





                                             पूर्ण आंतरिक परावर्तन

जब प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो अभिलंब से दूर हट जाती है लेकिन यदि आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण  से अधिक हो तो प्रकाश उसी माध्यम (सघन माध्यम) में लौट जाता है प्रकाश की यह घटना पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहलाती है

यह परावर्तन की तुलना में एक बेहतर घटना है क्योंकि इसमें प्रकाश की तीव्रता में कोई क्षति नहीं होती है | संचार के क्षेत्र में प्रकाश तंतु का प्रयोग पूर्ण आंतरिक परावर्तन की देन है

पूर्ण आंतरिक परावर्तन का दैनिक जीवन में उपयोग
1 हीरे का चमकना
2 मृग मरीचिका का बनना, सड़कों पर मरीचिका का बनना
3 प्रकाश तंतु

प्रिज्मा में से श्वेत प्रकाश के गुजरने पर यह अपने 7 मूल रंगों में विभाजित हो जाता है प्रकाश की इस घटना को वर्ण विक्षेपण कहते हैं

वर्ण विक्षेपण की घटना में इन सात रंगों का प्राप्त होने का मुख्य कारण विभिन्न रंगों की किरणों का किसी माध्यम में भिन्न-भिन्न वेग से गति करना है

वर्षा की बूंदों में प्रकाश के अपवर्तन, पूर्ण आंतरिक परावर्तन तथा प्रकीर्णन के कारण वर्ण विक्षेपण की घटना होती है जिससे इंद्रधनुष दिखाई देता है



दो वक्र पृष्ठों से घिरा हुआ पारदर्शक माध्यम लेंस कहलाता है
               लेंस


ऐसे लेंस जो किनारों से मोटे तथा बीच में से पतले हो अवतल लेंस कहलाते हैं यह लेंस समांतर आने वाली प्रकाश किरणों को फैला देता है इसलिए इसे अपसारी लेंस भी कहते हैं

अपसारी लेंस तीन प्रकार के होते हैं
उभयावतल
समतलावतल
उतलावतल

 
उतल लेंस किनारो सेपतले एवं बीच में सेमोटे होते हैं यह समांतर प्रकाश किरणों को अपवर्तन के बाद एक स्थान पर फॉक्सित कर देते हैं इसलिए इसे अभिसारी लेंस कहते हैं |
यह तीन प्रकार के होते हैं
उभयोतल लेंस -दोनों पृष्ठ उत्तल
समतलोतल - एक पृष्ठ उत्तल एक पृष्ठ समतल
अवतलोतल - एक पृष्ठ अवतल एक पृष्ठ उत्तल


 
उतल लेंस या अभिसारी लेंसअवतल लेंस या अपसारी लेंस
















Ø  लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसारित अपसरित  करने की क्षमता लेंस की क्षमता कहलाती है

Ø  लेंस की क्षमता उसकी फोकस दूरी के व्युत्क्रम होती है

p=

Ø  pका मात्रक डाई ऑप्टर हैं

यदि हम दो या दो से अधिक लेंसों को मिला दे तो उसकी परिणामी क्षमता

नेत्र की संरचना

निकट दृष्टि दोष- निकट दृष्टि दोष में व्यक्ति को निकट की वस्तुएं स्पष्ट  परंतु दूर की वस्तुएं स्पष्ट दिखाई नहीं देती है इस दोष का मुख्य कारण नेत्र लेंस की वक्रता का बढ़ना है जिसके कारण दूर रखी वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना से पहले बन जाता है
इस दोष के निवारण के लिए उचित क्षमता वाले अवतल लेंस को नेत्र के आगे लगाया जाता है |


दूर दृष्टि दोष .. दूर दृष्टि दोष में दूर की वस्तुएं स्पष्ट दिखाई देती है परंतु निकट की वस्तुएं स्पष्ट दिखाई नहीं देतीहै |
इसका मुख्य कारण रेटिना से दूर प्रतिबिंब का बनना
इस दोष के निवारण के लिए उचित क्षमता का उत्तल लेंस नेत्र के आगे लगाया जाता हैको